३३ करोड़ न के ३३ प्रकार के देवी देवता : Its 330 Millions not 33 types of Hindu Devta

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हिन्दू धर्म भटका है और उससे भटकाने का काम किसी बाहर के व्यक्ति ने नहीं हमारी खुद की अज्ञानता ने किया | अगर आप अपने धर्म को जानते तो आपको कोई गलत पढ़ा ही नहीं सकता था |

हिन्दू ग्रंथो में ३३ कोटि के देवी देवताओ का वर्णन है | कोटि का अर्थ “करोड़” भी है एवं “प्रकार” भी | इस तर्क को बहुत से हिन्दू, इंटरनेट के प्रचलन में, स्वीकार चुके हैं के हिन्दुओं में ३३ प्रकार के देवी देवता हैं और कुछ तो बड़े आत्मविश्वास के साथ इसको बताते भी हैं |

गलती उनकी नहीं हमारी पीढ़ियों की है जिन्होंने ना खुद धर्म को जाना न अपनी आने वाली पीढ़ियों को समझाया |

इस गलती को स्वीकार करने में हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा पालन है, क्यूंकि हिन्दू धर्म में काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार को त्यागना सबसे उत्तम कार्य माना गया है | अहंकार तो लंकेश रावण को ले डूबा था, हम तो छोटे मनुष्य हैं |

‘शतपथ ब्राह्मण’ (4.5.7.2) में 33 देवताओं की सूची अपेक्षाकृत भिन्न है जिनमें 8 वसुओं, 11 रुद्रों, 12 आदित्यों के सिवा आकाश और पृथ्वी गिनाए गए हैं।

12 आदित्य : 1. अंशुमान, 2. अर्यमा, 3. इन्द्र, 4. त्वष्टा, 5. धाता, 6. पर्जन्य, 7. पूषा, 8. भग, 9. मित्र, 10. वरुण, 11. विवस्वान और 12. विष्णु।
8 वसु : 1. अप, 2. ध्रुव, 3. सोम, 4. धर, 5. अनिल, 6. अनल, 7. प्रत्यूष और 8. प्रभाष।
11 रुद्र : 1. शम्भू, 2. पिनाकी, 3. गिरीश, 4. स्थाणु, 5. भर्ग, 6. भव, 7. सदाशिव, 8. शिव, 9. हर, 10. शर्व और 11. कपाली।
2 अश्विनी कुमार : 1. नासत्य और 2. दस्त्र।

12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और इन्द्र व प्रजापति को मिलाकर कुल 33 देवता होते हैं। कुछ विद्वान इन्द्र और प्रजापति की जगह 2 अश्विनी कुमारों को रखते हैं। प्रजापति ही ब्रह्मा हैं। परन्तु 33 से अधिक देवता भी अति प्राचिन है। ऋग्वेद के दो मंत्रों में (3.9.9 ; 1.52.6) 3339 देवताओं का उल्लेख है।

तर्क सांगत रूप में वेदों में ही इस प्रश्न का उत्तर है | परन्तु हमने एक तथ्य जिसका ज्ञान हमें नहीं था को बड़ी आसानी से स्वीकार कर लिया क्योकि शायद हमें अलग अलग वेदों में अलग अलग देवताओ की गिनती करना मुश्किल लगा |

अब धर्म ग्रंथो को छोड़ कर बात करें तो भी अगर किसी ने कभी गाँव देखे हो तो शायद उससे पता हो के हर गाँव के कुल देवी या देवता होते हैं | हर परिवार में कुल देवी एवं देवता होते हैं | अगर आपको अपने कुल देवता का नाम नहीं पता तो आप अपने हिन्दू होने के विश्वास को थोड़ा कम करें | हरिद्वार जाएं, अगर आपके पूर्वज मॉडर्न या लिबरल नहीं थे तो आपको वहां ना केवल आपके खानदान की जानकारी बल्कि आपके कुल गुरु और देवी/देवता का नाम भी मिल जायेगा |

भारत वर्ष के करोडो गाँव और करोडो परिवार | सबके अपने अलग देवता | क्या ये असल में देवता थे ?

उत्तर है हाँ | हिन्दू धर्म में आत्मा को परमात्मा का अंश माना गया है और मोक्ष प्राप्ति पे यह आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है | इस मोक्ष प्राप्ति के लिए आपको अच्छे और सच्चे कार्य मदद करते हैं | अब आपने देखा होगा के कई गावों में एक कुत्ते या बिल्ली की मूर्ति बना कर पूजा होती है | आप उनको अनपढ़ समझते होंगे और हस्ते होंगे | कभी उस कुत्ते या बिल्ली का इतिहास पूछा?

पुराने समय में जब कोई आत्मा किसी के लिए अच्छा काम करते हुए अपने जीवन का त्याग करती थी तो वह पूजनीय हो जाती थी | मान लीजिये किसी गाँव पर एक शेर ने हमला कर दिया, और वह एक आदमी को मारने ही वाला था के अचानक से वह कुत्ता वहां उनके बीच में आ गया | आदमी मौका तलाश के भाग गया और कुत्ते और शेर की लड़ाई में वह कुत्ता अपनी जान गवा गया | उस कुत्ते ने अपने कर्म से मोक्ष की प्राप्ति कर ली | उस कुत्ते की आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाएगी इसलिए वह स्वयं भी परमात्मा बन जाएगी | इसलिए उसको कुल देवता बना कर पूजा जाता था | सिर्फ मनुष्य ही नहीं सब प्रकार के जीवन में आत्मा है और वह मोक्ष प्राप्त कर सकती है |

इसके अलावा भी विभिन्न प्रकार के देवी और देवताओं को हम पूजते हैं | क्या गिनती ३३ करोड़ पे रुक गयी? नहीं | यह आज भी बढ़ रही है | परन्तु हम ग्यानी लोग कहाँ गिनते हैं उनको | हम तो आज भी जो समझ में ना आये उससे तर्कहीन या अनपढ़ कह कर नकार देना सुविधापूर्ण समझते हैं |

एक बात का ज्ञान रखिये | अपने कर्मो से आप भी देवता हो सकते हैं और हिन्दू ऐसा केवल एक ही धर्म है जो आपको भगवान् (देवता) बनने का अवसर देता है | बाकी सभी धर्मो में आप सिर्फ एक गुलाम हैं जो अपने कार्य को पूर्ण करने आया है |

भगवान् आपकी आत्मा को शान्ति दे |

जय श्री राम| जय श्री कृष्णा ||

Hindus are confused and the confusion is not imported but due to lack of self-realization. If you realize who you are, you cannot be confused.

Hindu scriptures mention word “33 Koti” on how many Devtas Hindus have. Now one meaning of Koti is “10 millions” and other meaning is “Types”. So Hindus, under the influence of internet, have accepted that Hindus have 33 types of Devta, not 330 millions of them. They also express this with such confidence that they have read the entire Vedas.

Its not their mistake, but our forefathers (recent ones), who never bothered to knew our religion and never taught their coming generations.

Accepting what is wrong is first duty of a Hindu since Hindu religion encourages negating the feelings of sex, anger, greed, affection and ego. Not accepting a wrong due to ego was the end of Raavana, we’re just small people.

“Shatpath Brahman” (4.5.7.2) lists 33 Devta which are as below:

 

12 Aditya: 1. Anshuman 2. Ayarma 3. Indra 4. Tvashta 5. Dhaata 6. Parjanya 7. Pusha 8. Bhag 9. Mitra 10. Varun 11. Vivasvaan 12. Vishnu

8 Vasu: 1. Ap 2. Dhruv 3. Som 4. Dhar 5. Anil 6. Anal 7. Pratyushn 8. Prabhaash

11 Rudra: 1. Shambhu 2. Pinaaki 3. Girish 4. Sthanu 5. Bharg 6. Bhav 7. Sadashiv 8. Shiv 9. Har 10. Sharv 11. Kapaali

2 Ashwini Kumar: 1. Natasya 2 Dastra

12 Aditya, 8 Vasu, 11 Rudra and Indra plus Prajaapti, 33 in total. Some intellectuals replace Indra and Prajapati with Ashwani & Kumar. But even more than 33 Devtas are also from old times. Two Hymns of Rig Veda (3.9.9 ; 1.52.6) mention 3339 Devtas.

Logically this question has been answered in Vedas themselves. But we accepted a logic that was spread due to lack of knowledge and self-realization. This also eased our discomfort of finding and counting 330 millions of Devtas.

If we stop talking from Vedas, and just look at an Indian village, we know that every village has his own “Kul Devi/Devta”. Every family has its own “Kul Devi/Devta”. If you are a Hindu and do not know about your “Kul Devi/Devta”, please lower your self-confidence of being a Hindu. Go to Haridwar where, if your previous generations were not modern or liberal, you’ll find the details of your entire generations and you’ll also know who is your Kul-Guru and “Kul Devi/Devta”.

India’s millions of villages and families, all those Devtas, are they really Devta?

Answer is YES. Hindus consider their soul a part of the divine soul (Parmaatma) and attaining salvation is the only way for our soul to go back to its origination i.e. divine soul. This salvation takes a lot of good and righteous deeds. You might have seen a village worshipping a dog or cat by building a statue of it. You might consider them illiterate but you never asked them the history, did you?

In old times, when a soul left his life in righteous deed, it became worth worshipping. Imagine a village was under attack from a Lion and the lion was about to kill a man, when suddenly this dog stepped between them and started fighting the lion. The man escaped and dog was killed by Iion. That dog, for its righteous deeds, attained salvation and his soul became a part of divine soul again, as such the soul of that dog itself will become divine. That is why such souls were worshipped. Not only humans but every living thing on this planet has a soul and can attain salvation, according to Hinduism.

Apart from that we still worship many different types of Devi/Devtas. Has the counting stopped on 330 millions? No. Its still increasing but we’re now educated enough to not bother counting them. Whatever is beyond the scope of our understanding, it ends up being illogical or illiterate, because that’s the easy way of ignoring.

Remember one fact, it is only in Hinduism that you can become God yourself with your righteous deeds. Rest of the religions treat you as slave who came on earth to finish a scripted task.

May Bhagwan bless peace to your soul.

Jai Shri Ram. Jai Shri Krishna..

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