क्या हिजाब अल्लाह का फरमान था?: Hijaab – Is it really from Allah?

(Scroll down for English)

इस से पहले के हम हिजाब पे वार्तालाप आरम्भ करें, हमें “उमार” नामक व्यक्ति के बारे में जान लेना चाहिए | उमार एक ताकतवर आदमी थे जो कभी पैगम्बर मोहम्मद को मारना चाहते थे | बाद में वह इस्लाम में परिवर्तित हुए और मोहम्मद के सबसे करीबी और उनके सलाहकार बने | बहुत सी हदिथो में पैगम्बर मोहम्मद को उमार की तारीफ़ करते देखा गया है और वह पैगम्बर मोहम्मद के इतने अजीज थे के उनके बाद वह दूसरे पैगम्बर तक बन सकते थे |

“अगर मेरे बाद कोई पैगम्बर हो सकता है, तो वह खत्तब का पुत्र उमार ही है |” [सुनन टार्मिधि ३६८६]

चलिए अब विषय पर वापसी करते हैं, हिजाब | उमार की पैगम्बर मोहम्मद की बीवियों की तरफ रूचि थी, जो क़ुरान के हिसाब से सब मुस्लिमो की माँ समान हैं | बहुत बार उमार ने पैगम्बर मोहम्मद को कहा के वह अपनी बीवियों को ढक कर रखें पर पैगम्बर मोहम्मद ने ऐसा करने से मना कर दिया | हिजाब का रिवाज इस्लाम से पहले नहीं था और ना ही इस्लाम में था, जब तक निम्न लिखित घटनाये नहीं हुई |

“आइशा ने कहा के पैगम्बर की बीवियां रात को खुले खेतो में मल मूत्र के लिए जाती थी तब उमार कहते थे, “हे पैगम्बर, अपनी बीवियों को कहें के वो खुद को ढक ले | पर पैगम्बर ने ऐसा नहीं किया | जब जार्न की पुत्री सउदा, पैगम्बर की बीवी, एक बार रात के अँधेरे में बाहर निकली, क्योकि वो लम्बे कद काठी की थी, उमार ने उन्हें आवाज दी और कहा: सउदा, मैंने तुम्हे पहचान लिया | (उसने ऐसा इस आशा से किया की पर्दा करने की प्रथा को कुरान के जरिये जन्म दिया जा सके) आइशा ने कहा; अल्लाह ने इसके बाद क़ुरान में हिजाब की प्रथा का आदेश दिया |” [सहीह मुस्लिम २६:५३९७]

यही बात सहीह अल बुखारी के १:४:१४८ में भी कही गयी है |

क्योंकि उमार एक ताकतवर व्यक्ति थे और पैगम्बर के करीबी थे, बजाए इसके के उमार को इस बदसलूकी की सजा दी जाये, अल्लाह और पैगम्बर ने कुरान का आदेश फ़रमाया:

“धार्मिक औरतो को हमेशा अपने शरीर के अंग ढक के रखने चाहिए; और किसी को दिखाने नहीं चाहिए | उनको अपनी छाती पर ख़िमार डालना चाहिए और अपनी सुंदरता को सिवाए अपने पति, अपने पिता, अपने पति के पिता, अपने बच्चों, अपने पति के बच्चों, अपने भाई के बच्चों, अपनी बहन के बच्चों, अपनी औरतो, अपने गुलामो, अपने आदमी नौकर जिनमे सेक्स की जरूरत ना हो, बच्चे जिनमे सेक्स की शर्म की भावना ना हो, के बिना किसी और को नहीं दिखाना चाहिए | [ कुरान २४:३१ ]

“ओ पैगम्बर! अपनी बीवियों, बेटियों और धर्म में विश्वास करने वाली औरतो को कहें के वो अपने को कपड़ो से ढक के रखें (जब बाहर हों): ये सुविधाजनक है ताकि उनकी पहचान हो सके और उन्हें कोई परेशान न करे |” [ कुरान ३३:५९]

यह एकमात्र ऐसा समय नहीं था जब उमार ने अल्लाह को फरमान के लिए मजबूर किया था |

“इब्न उम्र ने कहा के उमार कहते थे: मेरे अल्लाह को मैंने ३ मोको पर अपनी बात पे मनाया | इब्राहम, पर्दा और बद्र के कैदियों पर |” [ सहीह मुस्लिम ३१:५९०३]

यही बात सहीह अल बुखारी ६:६०:१० में भी लिखित है |

पर यह यहीं ख़त्म नहीं हुआ | बावजूद इसके की पर्दा को जरूरी कर दिया गया था, उमार ने फिर अपनी गन्दी नियत का साबुत दिया और पैगम्बर की बीवियों के साथ बदसलूकी की | फिर भी ना अल्लाह और ना मोहमद ने उमार को कोई दंड दिया |

“आइशा ने कहा: सउदा (पैगम्बर की बीवी) मल मूत्र के लिए बाहर गयी, जब पर्दा करना जरूरी कर दिया गया था | वह तगड़ी और लम्बी थी, इसलिए सभी उसको पहचान सकते थे | तब खत्तब के पुत्र उमार ने कहा,”ओ सउदा! अल्लाह के कर्म से तुम खुद को हमसे छुपा नहीं सकती, तो कोई और तरीका ढूंढो जिस से तुम्हे पहचाना ना जा सके |” सउदा ने वापस आकर यह बात पैगम्बर को कही जब वह मेरे घर पर खाना खा रहे थे और मीट से भरी हुई हड्डी उनके हाथ में थी |” [ सहीह अल बुखारी ६:६०:३१८]

इन् हदिथो से यह साबित हुआ है के पैगम्बर मोहम्मद साहब मजबूर हुए थे हालात से जब उन्होंने अल्लाह के रास्ते से इस प्रथा का फरमान किया, क्योकि वह उमार से लड़ नहीं सकते थे | जिनके ऊपर हम अपने मौत के बाद की जिम्मेवारी छोड़ते हैं वो अपनी जिंदगी के दौरान अपनों को बचा नहीं पा रहे थे | सवाल हम पर है के क्या हम अभी भी उन् प्रथाओं को चलाना चाहेंगे या अपनी बहनो, बेटियों, माओ और बीवियों को इस गुलामी की क़ैद से आजाद करवाएंगे |

आपका जीवन सुखमय हो |

Before we even start on origination of Hijaab, Umar is someone we need to know about. Umar was a tough guy who wanted to kill Prophet Mohammad. Later Umar converted to Islam and was one of the closest person of Prophet Mohammad and his adviser. Multiple hadiths see Prophet Mohammad praising Umar and he was so dear to Prophet Mohammad that he was to be 2nd “Rashidun” Caliph after Prophet Mohammad.

“If there were to be a prophet after me, indeed he would be Umar, son of Khattab.” [Sunan Tirmidhi, Hadith 3686]

Now let’s get back to the topic, Hijaab. Umar had a keen interest in Prophet Mohammad’s wives, which according to Quran are mothers for the entirety of Islam. Many times Umar asked Prophet Mohammad to VEIL HIS WIVES, but Prophet Mohammad ignored. Hijaab wasn’t a practice before Islam, and neither in Islam until incidents mentioned herein happened.

“‘A’isha reported that the wives of Allah’s Messenger ﷺ used to go out in the cover of night when they went to open fields (in the outskirts of Medina) for easing themselves. ‘Umar b Khattab used to say: Allah’s Messenger, ask your ladies to observe veil, but Allah’s Messenger ﷺ did not do that. So there went out Sauda, daughter of Zarn’a, the wife of Allah’s Messenger ﷺ, during one of the nights when it was dark. She was a tall statured lady. ‘Umar called her saying: Sauda, we recognise you. (He did this with the hope that the verses pertaining to veil would be revealed.) ‘A’isha said: Allah, the Exalted and Glorious, then revealed the verses pertaining to veil.” [Sahih Muslim 26:5397]

The same thing has also been mentioned in multiple other hadiths like Sahih Al Bukhari 1:4:148.

Because Umar was a powerful man and dear to Allah’s Apostle (Prophet Mohammad), instead of Allah or Prophet Mohammad punishing his bad intentions and wishes, they instead fulfilled his wishes to VEIL FEMALE BODIES and revealed a Quran verse:

“And say to the believing women that they should lower their gaze and guard their private parts; that they should not display their beauty and ornaments except what (must ordinarily) appear thereof; that they should draw their khimār over their breasts and not display their beauty except to their husband, their fathers, their husband’s fathers, their sons, their husbands’ sons, their brothers or their brothers’ sons, or their sisters’ sons, or their women, or the slaves whom their right hands possess, or male servants free of physical needs, or small children who have no sense of the shame of sex; and that they should not strike their feet in order to draw attention to their hidden ornaments.” [Quran 24:31]

“O Prophet! Enjoin your wives, your daughters, and the wives of true believers that they should cast their outer garments over their persons (when abroad): That is most convenient, that they may be distinguished and not be harassed.” [Quran 33:59]

It wasn’t the only incident where Allah was forced to reveal a Quran verse on the wishes of Umar.

“Ibn Umar reported Umar as saying: My lord concorded with (my judgments) on three occasions. In case of the Station of Ibrahim, in case of the observance of veil and in case of the prisoners of Badr.” [Sahih Muslim 31:5903]

The same is also mentioned in Sahih Al Bukhari 6:60:10

It wasn’t over here. Despite making the VEIL mandatory to observe, again Umar showed his bad intentions towards Prophet’s wives and still neither Prophet Mohammad nor Allah could punish him for this.

“Narrated Aisha: Sauda (the wife of the Prophet) went out to answer the call of nature after it was made obligatory (for all the Muslims ladies) to observe the veil. She was a fat huge lady, and everybody who knew her before could recognize her. So `Umar bin Al-Khattab saw her and said, “O Sauda! By Allah, you cannot hide yourself from us, so think of a way by which you should not be recognized on going out. Sauda returned while Allah’s Messenger (ﷺ) was in my house taking his supper and a bone covered with meat was in his hand.” [Sahih Al Bukhari 6:60:318]

It is evident from the hadiths that Prophet Mohammad was forced by circumstances, because he couldn’t fight Umar. The one we look upon to give us afterlife insurances was himself not able to protect his own during his own lifetime. The question is upon us, do we still want to observe this as our tradition or show that Allah has given us enough strength now that we can protect our women and not force them to stay in a confinement.

Peace be upon you O READER.

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